"योगी" की जीत
बीजेपी की यृपी में प्रचंड जीत के बाद से ही सोशल मीडिया के माध्यम से तो कहीं दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर कुछ अफ़वाहों का दौर चलने लगा था जिसमें मुसलिम समाज में खौफ फैलाया जा रहा था और समाज में ज़हर फैलाया जा रहा था। अब योगी के सीएम बनने पर संभावित है कि समाज के कुछ उपद्रवी तत्व और अफवाहें फैलाने लगें।इन अफवाहों से बचे रहें और आपसी सौहार्द कायम रखें यह ज़िम्मेदारी अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समाज दोनों की है। योगी आदित्यनाथ को कमान सौंपना यदि बीजेपी के फिर से भगवा राजनीति की ओर लौटने की ओर उठाया गया एक बङा कदम है तो बीजेपी की ऐतिहासिक जीत वर्षों से चली आ रही छद्म सेक्युलरवादिता से मोहभंग भी है।दरअसल परिणामों से और भगवा ओढने वाले के मुख्यमंत्री बनने से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि सेक्युलर विचारधारा खतरे में है या हिंदू ध्रुवीकरण बलशाली है,बल्कि यह छद्म सेक्युलरवादिता और सेक्युलर दिवालियापन के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।वही छद्म सेक्युलरवाद जिसके हिसाब से भगवा पहनना सांप्रदायिक है पर मुस्लिम टोपी पहनना सेक्युलर,वही छद्म सेक्युलरवाद जिसको जलीकट्टू में क्रूरता तो नजर आती है पर...